क्या है एस्मा ? ESSENTIAL SERVICES MAINTENANCE :क्यों लगाती है सरकार एस्मा

आज हम आपको एसेंशियल सर्विसेज मैनेजमेंट एक्ट एस्मा के बारे में बताने वाले हैं जिस का हिंदी अर्थ आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून है ,जब कभी भी कर्मचारी हड़ताल करते हैं तब एस्मा लगाया जाता है तो आइए जानते हैं क्या है एस्मा :

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एस्मा किसे कहते है?

एस्मा हड़ताल को रोकने के लिए लगाया जाता है अधिकतम 6 मंथ के लिए लगाया जा सकता है और इसके लागू होने के बाद अगर कोई कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो वह अवैध माना जाता है.

 इसमें लागू करने के पहले वह इससे प्रभावित होने वाले कर्मचारियों को किसी समाचार पत्र या अन्य माध्यम से उन्हें सूचित कर दिया जाता है ।

दूसरे शब्दों में कहें तो यह कानून  एक ऐसा कानून है जिसके लागू होने पर आप कभी भी कोई हड़ताल नहीं कर सकते ।

एस्मा कब लागू हुआ :

एस्मा 1968 में लागू किया गया था, यह कानून निश्चित सेवा और समुदायों के सामान्य जीवन को बनाए रखता है. इस अधिनियम में आवश्यक सेवाओं की एक लंबी सूची शामिल है, जिसमें पोस्ट और टेलीग्राफ से लेकर रेलवे हवाई अड्डे और कोर्ट संचालन के माध्यम तक की सूची है।

एस्मा का पूरा नाम क्या है?

ESMA full form : एस्मा का पूरा नाम "ESSENTIAL SERVICES MAINTENANCE"  ("आवश्यक सेवा अनुरक्षण कानून") होता है.

क्यों लगाती है सरकार एस्मा :

सरकार एस्मा लगाने का फैसला इसलिए करती है क्योंकि हड़ताल की वजह से लोगों के लिए आवश्यक सेवाओं पर बुरा असर पड़ने लगता है इस बिगड़ने की स्थिति को सुधारने के लिए सरकार एस्मा  लगाती है ।

हाल ही में लागू हुआ है एस्मा :

कोरोना के इस संकटकाल में भारत के कई जगह पर एस्मा को लगु किया गया है.
योगी सरकार ने हाल ही में माध्यमिक शिक्षा परिषद के सभी सेवाओं में 3 माह तक की सारी हड़ताल पर रोक लगा दी है ।



एस्मा के प्रावधान :

अगर हम एस्मा के प्रावधान की बात करे तो एस्मा एक्ट को कुल 9 धाराओं में बांटा गया है-

धारा 1 :

इसमें एस्मा भारत में कहां-कहां पर लागू किया जा सकता है तथा कितने समय अंतराल के लिए लगाया जा सकता है उल्लेखित किया गया है।

धारा 2 :

एस्मा की परिभाषा तथा आवश्यक सेवाओं की सूची

धारा 3 :

कुछ नियोजनों में हड़ताल को प्रतिबंध करने की शक्ति - यदि केंद्र सरकार इस बात से संतुष्ट है कि सार्वजनिक हित में ऐसा करना आवश्यक है तो वह एक आदेश द्वारा इस एक्ट को लागू कर हड़ताल पर प्रतिबंध लगा सकती है ।

धारा 4 :

अवैध हड़ताल हेतु जुर्माना - यदि इस अधिनियम के अंतर्गत आने वाला कोई व्यक्ति इस एक्ट के लागू होने के बाद हड़ताल शुरु करता है या उस में भाग लेता है तो वह 6 माह के कारावास या ₹200 या दोनों से दंडित होता है ।

धारा 5 :

 हड़ताल हेतु उकसाने के लिए दंड - कोई भी व्यक्ति जो अन्य व्यक्तियों को हड़ताल के लिए उकसाता है तो वह 1 साल के कारावास या ₹1000 जुर्माना या दोनों से दंडित होता है ।

धारा 6 :

अवैध हड़ताल को वित्तीय सहायता देने के लिए जुर्माना - यदि कोई व्यक्ति एस्मा एक्ट के अंतर्गत अवैध हड़तालो को वित्त पोषित करता है तो 1 साल के कारावास या ₹1000 जुर्माना या दोनों से दंडित होता है ।

धारा 7 :

 बिना वारंट की गिरफ्तारी की शक्ति - कोई भी पुलिस अधिकारी बिना वारंट के किसी ऐसे व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकता है जिस पर इस अधिनियम के तहत कोई भी अपराध करने का संदेह है ।

धारा 8 :

अन्य कानून को रद्द करने की शक्ति - अधिनियम इस धारा के अनुसार यदि कोई अन्य अधिनियम का टकराव इस अधिनियम की धारा से होता है तो एस्मा एक्ट को प्राथमिकता दी जाती है ।

धारा 9 :

अधिनियम को निरस्त करने की शक्ति - सरकार कभी भी एक्ट को निरस्त कर सकती है इस तरह के निरसन के बावजूद भी उस एक्ट के तहत की गई किसी भी कार्यवाही को वैध माना जाएगा ।


एस्मा कौन लागू कर सकता है :

इसमें लागू करने की स्वतंत्रता राज्य सरकार के पास होती है लेकिन एक केंद्रीय कानून है इसलिए हर देश के राज्य ने अपने कानून में परिवर्तन कर अपना एक अलग एस्मा बना लिया है।

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